Buxwah

मेजर ध्यानचंद पर प्रशासन ने मूंदी आंखें


कोरोना काल में भाईचारे का संदेश देते लोग

हॉकी के जादूगर पद्म विभूषण मेजर ध्यानचंद सदैव ही हम सभी देशवासियों का गौरव रहे हैं और अनंतकाल तक रहेंगे। राष्ट्रीय खेल के प्रति उनका समर्पण हमेशा से युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। लेकिन कई मौकों पर ऐसा प्रतीत होता है कि देश के इस महान सपूत को, असल सम्मान देने में हम कहीं पीछे छूट गए हैं।

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2014 में मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफ़ारिश को ठुकराते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्न' दे दिया था.आरटीआई से मिली जानकारियों के मुताबिक 2013 में मेजर ध्यानचंद का बायोडेटा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में कई महीने पहले ही पहुंच चुका था. उस पर पीएम की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन बाद में अचानक सचिन के नाम पर मुहर लगा दी गई.

अब झांसी स्थिति उनके समाधि स्थल और स्टैचू से आने वाली खबरें सुर्खियों से नदारत हैं और इस ओर प्रशासन भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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