Buxwah

FacebooktwitterwpEmailaffiliates बदलाव के संवाहक बने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विद्यार्थी


विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपने ज्ञान और कौशल से नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से चुनौतियों का समाधान ढूंढे। ग्रामीण क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए विद्यार्थी और युवा शोधार्थी युवानुकूल सामाजिक संरचना , प्रतिभा और ज्ञान से वंचित वर्ग के कल्याण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देवें। भारत देश के गांव अपनी अनमोल विरासत और विविधता के लिए विश्वविख्यात है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक आर्थिक विकास के आयामों में पहल करने से ग्रामीण जीवन सशक्त हुआ है।

यह बात मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के नौ वें दीक्षा समारोह में उपाधियां और गोल्ड मेडल बांटते हुए कहीं। उन्होंने होकर 52 छात्राओं और 35 छात्रों को मेडल एवं उपाधियां सौंपी। स्नातक एवं परास्नातक उत्तीर्ण करने वाले 2032 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। वहीं बीएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम के उत्तरीण विद्यार्थियों को 313 विकास खंडों मुख्यालयों में प्रदान की गई। कुलपति प्रोफेसर नरेश चंद्र गौतम ने संकाय वार प्रस्तुत उपाधि के पात्र विद्यार्थियों को दीक्षा शपथ दिलाई। कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रोफेसर एके मिश्र को मानध उपाधि दी गई। इसके पूर्व कृषि संकाय परिसर में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा का अनावरण किया। राज्यपाल ने कहा कि भारत रत्न नानाजी का भी मानना था कि देश के बदलाव का माध्यम और वहां की युवा पीढ़ी ही हो सकती है। गांवों में समग्र परिवर्तन महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक परिवर्तन हुए हैं। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी नाना जी के आदर्शो को आत्मसात करें। नानाजी ने अपनी सारी जिदगी गरीबों के कल्याण के लिए खपाई हैं। प्रो आईपी त्रिपाठी, प्रो डीपी राय, अमरजीत सिंह, प्रो नंदलाल मिश्रा, डॉ आंजनेय पांडेय, प्रो वीरेंद्र कुमार व्यास, कुलसचिव डॉ अजय कुमार व उप कुलसचिव डॉ कुसुम कुमारी सिंह रही।

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