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राजनीति में श्वेता सिंह के बढ़ते कदम ने दांपत्य जीवन में पैदा की खटास

 बाँदा  राजनीति में श्वेता सिंह के बढ़ते कदम ने दांपत्य जीवन में पैदा की खटास राजनीति में श्वेता सिंह के बढ़ते कदम ने दांपत्य जीवन में पैदा की खटासश्वेता सिंह गौर की संदिग्ध मौत ने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है..



बांदा, उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की संदिग्ध मौत ने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। हर कोई जानना चाहता है ऐसी कौन सी वजह है जिसकी वजह से राजनीति में तेजी से बढ़ रही श्वेता सिंह गौर मौत के मुंह में समा गई। दो साल पहले साधारण सी ग्रहणी चूल्हा चौका से निकलकर राजनीति में आई और कुछ ही दिनों में जिला पंचायत सदस्य व महिला मोर्चा की जिला महामंत्री बन गई। पत्नी की बढ़ती लोकप्रियता पति दीपक सिंह गौर को रास नहीं आई और दोनों के दांपत्य जीवन में धीरे धीरे जहर घुलने लगा। शायद यही वजह उनकी मौत का कारण बना।

पड़ोसी जनपद चित्रकूट की रहने वाली 35 वर्षीय श्वेता सिंह गौर की शादी बांदा शहर के इंदिरा नगर में रिटायर्ड  डीआईजी राज बहादुर सिंह के छोटे बेटे दीपक सिंह गौर के साथ हुई थी। समाजशास्त्र से पोस्ट ग्रेजुएट श्वेता सिंह की कोई सियासी पृष्ठभूमि नहीं है। शादी के बाद अपने 3 बच्चे और पति के साथ वह गृहस्थ जीवन बता रही थी। इनके अंदर किसी तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी नहीं थी लेकिन पति दीपक सिंह गौर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा थी। इसीलिए उसने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जसपुरा वार्ड लड़ा। लेकिन हार गए, फिर दीपक ने क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। इसके बाद उनकी नजर ब्लॉक प्रमुख पद पर थी दो बार ब्लाक प्रमुख चुनाव में भी किस्मत आजमाई लेकिन सफलता नहीं मिली।

पिछले वर्ष एक बार फिर जिला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी की, लेकिन जसपुरा वार्ड की सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई। ऐसे में उन्होंने पत्नी श्वेता सिंह को राजनीति में उतारा। श्वेता ने पहली बार में जिला पंचायत चुनाव की सीट जीत ली। पत्नी की जीत पर खुश दीपक ने अपनी पत्नी का प्रतिनिधि बनकर जिला पंचायत का कामकाज स्वयं संभालना शुरू कर दिया लेकिन यह सब ज्यादा दिन नहीं चला। स्वयं पढ़ी लिखी श्वेता सिंह ने राजनीति में सक्रिय होकर काम करना शुरू किया। जिससे पार्टी ने उन्हें महिला मोर्चा का जिला महामंत्री बना दिया। इसके बाद उन्होंने जिला पंचायत का कामकाज स्वयं देखना शुरू कर दिया। श्वेता सिंह की सक्रियता से पति का महत्व कम होने लगा, पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में उन्हें बुलावा आने लगा। जिसके कारण पति पत्नी के बीच संबंधों में दरार आने लगी और यही वजह मौत का कारण बन गई।

सोशल मीडिया में सक्रिय रहने के श्वेता के शौक ने उन्हें बहुत ही कम समय में पार्टी में लोकप्रिय बना दिया था। कार्यक्रम या आयोजन में अपनी सहभागिता की फोटो सोशल मीडिया पर वह खुद ही शेयर करती थीं। इंस्टाग्राम पर उनके 21,000 से ज्यादा और फेसबुक पर करीब 5000 फालोवर हैं। इंस्टाग्राम पर उनकी 1500 से ज्यादा पोस्ट हैं। इसमें अधिकतर फिल्मी गानों पर कुछ सेकेंड के रील्स हैं।

श्वेता सिंह गौर की संदिग्ध मौत ने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है..इन रील्स के जरिये उन्होंने अपनी  अदाकारी की भी झलक दिखाई। दो दिन पूर्व पूरे जनपद में नदी-नाला, तालाब खोदाई के अभियान में श्वेता ने अपने वार्ड में सूखे तालाब में खुद फावड़ा चलाकर इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की थी। सामाजिक कार्यों में शायद उनकी यह आखिरी तस्वीर थी। बताते चले कि शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला इंदिरा नगर निवासी रिटायर्ड डीआइजी राजबहादुर सिंह गौर की बहू व बीजेपी से जसपुरा क्षेत्र के वार्ड-12 की जिला पंचायत  श्वेता सिंह पत्नी दीपक सिंह गौर का शव बुधवार दोपहर घर में रस्सी के फंदे से लटका मिला था।


साभार- बुंदेलखंड न्यूज़


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