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बता दिया MP में शिवराज सिंह ही किंग?:गृहमंत्री ने खरगोन SP की तारीफ की, CM ने हटा दिया; सिंधिया को भी झटका?

 सियासत में कब किसकी चल जाए, किसका दांव उल्टा पड़ जाए, यह कहना मुश्किल है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। कई बार मंत्रियों में टकराव देखने को मिला। इस बार ये टकराव सीएम शिवराज सिंह और सरकार में नंबर दो के नेता माने जाने वाले गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिला है, तभी तो मंत्री नरोत्तम जिन अफसरों की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। सीएम शिवराज सिंह ने चुटकी में इधर से उधर कर दिया। उन्होंने बता दिया कि सरकार में 'किंग' तो वही हैं।



दरअसल, 10 अप्रैल​​​ रामनवमी पर खरगोन में हुई सांप्रदायिक घटना के दौरान पदस्थ जिन अफसरों को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा क्लीन चिट दे चुके थे। उनकी जमकर तारीफ की। अब ये दोनों अफसर सीएम शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी का शिकार हो गए। खरगोन दंगे के लिए अफसर कितने जिम्मेदार हैं? दैनिक भास्कर के इस सवाल के जवाब में गृहमंत्री मिश्रा ने कहा था कि अफसर मुस्तैद थे, तभी तो एसपी को गोली लगी। टीआई का सिर फटा। पुलिस के पांच जवान घायल हुए। किस पर कार्रवाई चाहते हैं, उन पर जो दंगा नियंत्रित कर रहे थे।

गृहमंत्री मिश्रा द्वारा दी गई इस क्लीन चिट को एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि 14 मई को सीएम शिवराज ने खरगोन दंगे में गोली लगने से घायल एसपी सिद्धार्थ चौधरी को हटा कर पुलिस मुख्यालय भोपाल में पदस्थ कर दिया। आईपीएस चौधरी के अलावा एएसपी नीरज चौरसिया को हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा गया। वहीं, खरगोन कलेक्टर अनुग्रह पी को दिल्ली भेज दिया है।

ग्वालियर के आईजी बदले गए गुना पुलिस हत्याकांड में ग्वालियर आईजी अनिल शर्मा को सीएम ने हटाया। कारण- आईजी शर्मा घटनास्थल पर करीब 7 घंटे बाद पहुंचे। शर्मा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं। इनकी ग्वालियर में हुई पोस्टिंग के पीछे भी राजनीतिक कारण बताए जाते हैं। यहां पहले ग्वालियर आईजी के पद के लिए डी. श्रीनिवास वर्मा का ही आदेश हुआ था, लेकिन अचानक समीकरण बदले। वर्मा की तब जॉइनिंग नहीं हो सकी थी, लेकिन अब शर्मा को हटाकर वर्मा को ग्वालियर आईजी की जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस ने इसे एक तीर से दो निशाने लगाना बताया।

हिजाब बना था दो मंत्रियों में टकराव का कारण कुछ महीने पहले शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। फरवरी में शिवराज सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा था कि हिजाब यूनिफॉर्म कोड का हिस्सा नहीं है। अगर कहीं कोई हिजाब पहनकर स्कूल आता है, तो प्रतिबंध लगाया जाएगा। मध्यप्रदेश में स्कूल यूनिफॉर्म कोड के अनुसार ही बच्चों को आना होगा। हम स्कूल यूनिफॉर्म कोड को लेकर काम कर रहे हैं।

मंत्री परमार का यह बयान आने के 24 घंटे के भीतर ही गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आ गया था। मिश्रा ने स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान को काटते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश सरकार के पास अभी ऐसा प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले में भ्रम की स्थिति ना रहे। इसके अलावा कोरोना के बीच स्कूल खोलने को लेकर भी दोनों में टकराव की स्थिति बनी थी। इसके पीछे भी कारण यही था कि पहले मुख्यमंत्री को समीक्षा करनी थी। इसके बाद उनके द्वारा फैसला लिया जाना था।



साभार- भास्कर 

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