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कलेक्टर की बीवी को 10 लाख की बिल्ली का तोहफा:ऐसी ही बिल्ली एक्ट्रेस जैकलीन को गिफ्ट मिली थी

 शौक बड़ी चीज है साहब... जितने ऊंचे लोग, उतने ही ऊंचे शौक। शौक पूरा हो जाए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता। मध्यप्रदेश में एक कलेक्टर की पत्नी का ऐसा ही ऊंचा शौक पूरा हुआ है। बिल्ली पालने का शौक, वो भी ऐसी-वैसी नहीं, पर्शियन बिल्ली। यह उसी ब्रीड की बिल्ली है, जो तिहाड़ जेल में बंद नटवरलाल सुकेश चंद्रशेखकर ने फिल्म एक्ट्रेस जैकलिन फर्नांडिस को गिफ्ट की थी। ईडी की चार्जशीट में इसका जिक्र भी है।

खास बात ये है कि बिल्ली टर्की से एक ठेकेदार ने मंगवाई। उसने बिल्ली खरीदकर लाने में 11 लाख रुपए (एक लाख रुपए जाने-आने का किराया भी शामिल) खर्च किए। सुना है कि ठेकेदार कलेक्टर की पत्नी को बिल्ली गिफ्ट करके खुश है, क्योंकि यह उसके लिए घाटे का नहीं, बल्कि फायदे का सौदा है। कलेक्टर की मेहरबानी से उसे बड़े ठेके जो मिल रहे हैं।

माननीयों के सोशल अकाउंट पर अब ‘सरकार’ की नजर BJP नेता भले ही चौड़ी छाती करके घूमें, लेकिन उनकी लगाम तो आलाकमान के हाथों में ही होती है। MP में अब BJP सरकार के मंत्रियों-विधायकों के सोशल अकाउंट पर ‘सरकार’ की नजर रहेगी। विधायक, खासकर मंत्री सोशल मीडिया पर कितने एक्टिव हैं? सोशल मीडिया पर अपने विभाग और केंद्र की योजनाओं के बारे में लिखा या नहीं? वह ऐसे लोगों से जुड़े हैं या नहीं, जिनकी सामाजिक तौर पर स्वीकार्यता है। इसकी जानकारी अब दिल्ली भेजी जाएगी। इतना ही नहीं, माननीयों के सोशल अकाउंट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं का लेखा-जोखा भी तैयार होगा। इस पर ‘सरकार’ की पैनी नजर होगी।

सुना है कि ‘सरकार’ ने चुनिंदा अफसरों को यह जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की है। ये कौन होंगे? यह सिर्फ ‘सरकार’ को पता होगा। दरअसल, हाल में ही दिल्ली में PM मोदी ने BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक ली थी। सुना है ये कवायद उसी बैठक का असर है।

‘सरकार’ के पास तो तुरुप के इक्के की काट भी एक सीनियर IPS अफसर को लेकर BJP के दो धड़ों में जमकर शीत युद्ध चल रहा है। मामला यह है कि यह अफसर अपनी प्राइम पोस्टिंग के लिए छटपटा रहे हैं। इन्हें हाल ही में ग्वालियर से हटाया गया था, लेकिन इनकी पोस्टिंग नहीं हुई। इन्हें जब ‘सरकार’ के रुख की भनक लगी तो दिल्ली से वीटो लगवाया। PHQ से लेकर गृह विभाग तक फाइल ऐसे दौड़ाई गई, मानों उसे पंख लग गए हों। फाइल में इस अफसर को PHQ की एक ऐसी शाखा का मुखिया बनाने का प्रस्ताव था, जिसका भारी-भरकम बजट है। सुना है कि फाइल जैसे ही ‘सरकार’ के सामने आई, उन्होंने बिना देरी किए एक अन्य IPS अफसर को यह पद देने का आदेश दे दिया।

इधर मुखबिर तंत्र ने इन्हें बता दिया कि ‘सरकार’ ने प्रस्ताव बदल दिया है। फिर क्या था, तत्काल दिल्ली से नेताजी का संदेश CM कार्यालय पहुंचा कि आदेश रोकिए… पुराने प्रस्ताव पर ही मंजूरी मिलेगी। लेकिन, ये हो न सका। आदेश जारी हुआ तो उस अफसर को प्रभार दे दिया गया, जो ‘सरकार’ का भरोसेमंद है। इस पर मंत्रालय के एक अफसर की टिप्पणी -”सरकार” के पास तो तुरुप के इक्के की काट भी है।

मुख्यमंत्री से बात कराने कटवा दी 'पप्पू' की दाढ़ी:IAS अफसर से हो गई गुस्ताखी; भीड़ कम होने से 'सरकार' नाराज बैकडोर प्रमोशन का रेट तय प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुपीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन, जिनका प्रमोशन करना है, उसके लिए तोड़ निकाल लिया गया। यहां बता दें कि यदि SC-ST के लिए रिजर्व पदों में कोई प्रभाव नहीं होता है तो प्रमोशन दिया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग का अभिमत अनिवार्य है। सुना है कि सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थ एक अफसर के करीबी ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं, जिन्हें प्रमोशन दिया जा सकता है। उन्होंने बाकायदा इसका रेट भी तय कर दिया है, लेकिन यह भनक मुख्यमंत्री कार्यालय को लग गई है।

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सफारी नहीं कराई तो तबादला अफसरों और तबादलों का चोली दामन का साथ होता है। कभी नेता नाराज तो तबादला, कभी बड़े अफसर नाखुश तो तबादला। भोपाल के वन विहार में एक ऐसे ही अफसर के तबादले की खूब चर्चा है। उनके ट्रांसफर में मुख्यमंत्री कार्यालय से मौखिक फरमान जारी हुआ।

पर्दे के पीछे कहानी यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक अफसर के रिश्तेदार वन विहार की सैर करने गए थे। उन्होंने यहां सफारी करने की मंशा जाहिर की। लेकिन, वहां मौजूद डिप्टी डायरेक्टर ने अनुमति नहीं दी। उन्हें बड़े अफसरों से फोन कराया, बावजूद इसके वे नियम तोड़ने को तैयार नहीं थे। बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची। सुना है कि डिप्टी डायरेक्टर को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए। एक घंटे में वन विभाग ने उनका मंडला ट्रांसफर आदेश जारी किया।

बेचारे.. अफसरों से मिन्नतें करते रहे कि उनका 6 महीने बाद रिटायरमेंट है। लिहाजा नियम के अनुसार उनका ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी और उन्हें तत्काल कार्यमुक्त कर दिया गया।

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